ऐन फ्रैंक के डायरी के पन्ने ॅ
शुक्रवार, 23 जनवरी, 1944 मेरी प्यारी किट्टी.
तुम्हारी ऐन
इधर के सप्ताहों में मुझे परिवार के वंश वृक्षों और राजसी परिवारों की वंशावली तालिकाओं में खासी रुचि हो गई है। मैं इस नतीजे पर पहुँची हूँ कि एक बार तुम खोजना शुरू कर दो तो तुम्हें अतीत में गहरे और गहरे उतरना पड़ेगा। इस खोज से तुम्हारे हाथ और
भी रोचक जानकारियाँ लगेंगी।
हालाँकि जब मेरे स्कूल के काम की बात आती है तो मैं बहुत मेहनत करती हूँ और रेडियो पर बी.बी.सी. की होम सर्विस को समझ सकती हूँ, इसके बावजूद मैं अपने ज़्यादातर रविवार अपने प्रिय फ़िल्मी कलाकारों की तसवीरें अलग करने और देखने में गुज़ारती हूँ। यह संग्रह अच्छा-खासा हो चुका है। मिस्टर कुगलर मुझ पर हर सोमवार कुछ ज्यादा ही मेहरबान होते हैं और मेरे लिए सिनेमा एंड थियेटर पत्रिका की प्रति लेते आते हैं। इस घर परिवार के ऐसे लोग भी, जो ज़रा भी दुनियादार नहीं हैं, इसे पैसों की बरबादी मानते हैं लेकिन इस बात पर हैरान भी होते हैं कि कैसे मैं एक साल के बाद भी किसी फ़िल्म के सभी कलाकारों के नाम ऊपर से नीचे तक सही-सही बता सकती हूँ। बेप जो अकसर छुट्टी के दिन अपने बॉयफ्रेंड के साथ फ़िल्म देखने जाती है, शनिवार को ही मुझे बता देती है कि वे कौन सी फ़िल्म देखने जा रहे हैं, तो मैं फ़िल्म के मुख्य नायकों और नायिकाओं के नाम तथा समीक्षाएँ फ़रटि से बोलना शुरू कर देती हूँ। हाल ही में मम्मी ने फ़िकरा कसा कि मुझे बाद में फ़िल्में
देखने जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, क्योंकि मुझे सारी फ़िल्मों की कहानियाँ, नायकों के नाम तथा समीक्षाएँ ज़बानी याद हैं। जब भी मैं नयी केश सज्जा बनाकर बाहर आती हूँ, मैं सबके चेहरों पर उग आई असहमति साफ़ साफ़ पढ़ सकती हूँ। और यह भी बता सकती हूँ कि कोई न कोई ज़रूर टोक देगा कि मैं फलाँ फ़िल्म स्टार की नकल कर रही हूँ। मेरा यह जवाब कि ये स्टाइल मेरा खुद का आविष्कार है, मज़ाक के रूप में लिया जाता है। जहाँ तक मेरे हेयर स्टाइल का सवाल है, यह आधे घंटे से ज्यादा नहीं टिका रहता। तब तक मैं उससे बोर हो चुकी होती हूँ और सबकी टिप्पणियाँ सुनते-सुनते मेरे कान पकने लगते हैं। मैं सीधे गुसलखाने की तरफ़ लपकती हूँ और मेरे बाल फिर से पहले की तरह उलझे हुए घुंघराले हो जाते हैं।